हिन्दी भाषा की उत्पति व उसका विकास
-हिन्दी शब्द की उत्पति हिन्दू शब्द से हुई है।
- हिन्दी भाषा की उत्पति-1000 ईस्वी पूर्व
हिन्दी व्याकरण-
हिन्दी भाषा को शुद्ध रूप मे बोलने तथा लिखने संबंधी नियमो का बोध कराने वाले शास्त्र को व्याकरण कहते है।
हिन्दी व्याकरण के अनुसार हिन्दी के स्वरूप का 4 खण्डो मे अध्ययन किया जाता है।
1• वर्ण।
2• शब्द।
3• वाक्य।
4• छन्द।
वर्ण-
भाषा की सबसे छोटी इकाई वर्ण है।जब हम वर्ण को बोलकर प्रकट करते है तो उसे ध्वनि कहते है।
उदाहरण-अ,आ,क,च इत्यादि।
वर्णो की संख्या-52
हिन्दी वर्णमाला मे स्वर-11 (अ,आ,इ,ई,उ,ऊ,ऋ,ए,ऐ,ओ,औ)
हिन्दी वर्णमाला मे व्यंजन-33
हिन्दी वर्णमाला मे अनुस्वार-1 (अं)
हिन्दी मे विसर्ग-1 (अः)
स्वर-
जिस ध्वनि को बोलने के लिए किसी अन्य वर्ण की सहायता ना लेनी पड़े।उसे स्वर कहते है।
जैसे-अ,इ इत्यादि।
स्वरो के भेद-
1•हस्व।
2•दीर्घ।
3•प्लुत।
हस्व-
जिन स्वरों के बोलने मे कम समय लगता है।उसे हस्व स्वर कहते है।
जैसे-अ,इ,उ,ऋ।
दीर्घ-
जिन शब्दों के बोलने मे अधिक समय लगे।उसे दीर्घ स्वर कहते है।
जैसे-आ,ई,ऊ,ए,ऐ,ओ,औ।
प्लुत-
जिन शब्दों के बोलने मे हस्व और दीर्घ से ज्यादा समय लगे।उसे प्लुत स्वर कहते है।
जैसे-ॐ।
अं और अः स्वर नही है।इन्हे आयोगवाह कहा जाता है।
व्यजंन-
जिस ध्वनि को बोलने के लिए अन्य वर्णो की सहायता लेनी पड़े।उसे व्यजंन कहते है।
जैसे-क्+अ=क।ख्+अ=ख।
व्यजंन के प्रकार-
1• स्पर्श व्यजंन।
क वर्ग-क,ख,ग,घ,ड़। (कण्ठय)
च वर्ग-च,छ,ज,झ,ञ। (तालव्य)
ट वर्ग-ट,ठ,ड,ढ,ण। (मूर्धन्य)
त वर्ग-त,थ,द,ध,न। (दंत्य)
प वर्ग-प,फ,ब,भ,म। (ओष्ठय)
2• अन्तस्थ व्यजंन।
य,र,ल,व।
3• उष्म व्यजंन।
श,ष,स,ह।
4• सयुक्त व्यंजन।
क्ष,त्र,ज्ञ,श्र।
उच्चारण के अनुसार व्यजंन के भेद-
1•अल्पप्राण व्यजंन।
2• महाप्राण व्यजंन।
अल्पप्राण व्यजंन-
जिन शब्दो के बोलने मे मुख से कम वायु निकले तथा कम समय लगे।उसे अल्पप्राण व्यजंन कहते है।इनकी सख्या 20 होती है।
जैसे-क,ग,ड़।
च,ज,ञ।
ट,ड,ण।
त,द,न।
प,ब,म।
य,र,ल,व।
महाप्राण व्यजंन-
जिन व्यजनो को बोलने मे अधिक प्रयत्न करना पड़े तथा मुख से ज्यादा वायु निकले।उन्हे महाप्राण व्यजंन कहते है।इनकी सख्यां 15 होती है।
जैसे-ख,घ।
छ,झ।
ठ,ढ।
थ,ध।
फ,भ।
श,ष,स,ह।
ढ़।
कपंन के आधार पर व्यजंन-
1•अघोष व्यजंन-अघोष व्यजंन की सख्या 13 होती है।
क,ख,च,छ,ट,ठ,त,थ,प,फ,श,ष,स।
2• सघोष व्यजन-सघोष व्यजंन की सख्या 31 होती है।
ग,घ,ड़,ज,झ,ञ,ड,ढ,ण,द,ध,न,ब,भ,म,य,र,ल,व,ह।
तथा अ से औ तक सभी स्वर।
हिन्दी व्याकरण के अनुसार हिन्दी के स्वरूप का 4 खण्डो मे अध्ययन किया जाता है।
1• वर्ण।
2• शब्द।
3• वाक्य।
4• छन्द।
वर्ण-
भाषा की सबसे छोटी इकाई वर्ण है।जब हम वर्ण को बोलकर प्रकट करते है तो उसे ध्वनि कहते है।
उदाहरण-अ,आ,क,च इत्यादि।
वर्णो की संख्या-52
हिन्दी वर्णमाला मे स्वर-11 (अ,आ,इ,ई,उ,ऊ,ऋ,ए,ऐ,ओ,औ)
हिन्दी वर्णमाला मे व्यंजन-33
हिन्दी वर्णमाला मे अनुस्वार-1 (अं)
हिन्दी मे विसर्ग-1 (अः)
स्वर-
जिस ध्वनि को बोलने के लिए किसी अन्य वर्ण की सहायता ना लेनी पड़े।उसे स्वर कहते है।
जैसे-अ,इ इत्यादि।
स्वरो के भेद-
1•हस्व।
2•दीर्घ।
3•प्लुत।
हस्व-
जिन स्वरों के बोलने मे कम समय लगता है।उसे हस्व स्वर कहते है।
जैसे-अ,इ,उ,ऋ।
दीर्घ-
जिन शब्दों के बोलने मे अधिक समय लगे।उसे दीर्घ स्वर कहते है।
जैसे-आ,ई,ऊ,ए,ऐ,ओ,औ।
प्लुत-
जिन शब्दों के बोलने मे हस्व और दीर्घ से ज्यादा समय लगे।उसे प्लुत स्वर कहते है।
जैसे-ॐ।
अं और अः स्वर नही है।इन्हे आयोगवाह कहा जाता है।
व्यजंन-
जिस ध्वनि को बोलने के लिए अन्य वर्णो की सहायता लेनी पड़े।उसे व्यजंन कहते है।
जैसे-क्+अ=क।ख्+अ=ख।
व्यजंन के प्रकार-
1• स्पर्श व्यजंन।
क वर्ग-क,ख,ग,घ,ड़। (कण्ठय)
च वर्ग-च,छ,ज,झ,ञ। (तालव्य)
ट वर्ग-ट,ठ,ड,ढ,ण। (मूर्धन्य)
त वर्ग-त,थ,द,ध,न। (दंत्य)
प वर्ग-प,फ,ब,भ,म। (ओष्ठय)
2• अन्तस्थ व्यजंन।
य,र,ल,व।
3• उष्म व्यजंन।
श,ष,स,ह।
4• सयुक्त व्यंजन।
क्ष,त्र,ज्ञ,श्र।
उच्चारण के अनुसार व्यजंन के भेद-
1•अल्पप्राण व्यजंन।
2• महाप्राण व्यजंन।
अल्पप्राण व्यजंन-
जिन शब्दो के बोलने मे मुख से कम वायु निकले तथा कम समय लगे।उसे अल्पप्राण व्यजंन कहते है।इनकी सख्या 20 होती है।
जैसे-क,ग,ड़।
च,ज,ञ।
ट,ड,ण।
त,द,न।
प,ब,म।
य,र,ल,व।
महाप्राण व्यजंन-
जिन व्यजनो को बोलने मे अधिक प्रयत्न करना पड़े तथा मुख से ज्यादा वायु निकले।उन्हे महाप्राण व्यजंन कहते है।इनकी सख्यां 15 होती है।
जैसे-ख,घ।
छ,झ।
ठ,ढ।
थ,ध।
फ,भ।
श,ष,स,ह।
ढ़।
कपंन के आधार पर व्यजंन-
1•अघोष व्यजंन-अघोष व्यजंन की सख्या 13 होती है।
क,ख,च,छ,ट,ठ,त,थ,प,फ,श,ष,स।
2• सघोष व्यजन-सघोष व्यजंन की सख्या 31 होती है।
ग,घ,ड़,ज,झ,ञ,ड,ढ,ण,द,ध,न,ब,भ,म,य,र,ल,व,ह।
तथा अ से औ तक सभी स्वर।

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